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भारत की संस्कृति दिखलाती वैशाखी

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धर्म डेस्क। अनेक राज्य, धर्म, भाषाएं,रीति-रिवाजों को खुद में समेटे हमारा भारत। उसकी अखंडता को और मजबूती प्रदान करते हमारे त्यौहार। कहा जाता है कि भारत त्यौहारों का देश है। यहां लोगों को उत्सव मनाने के लिए बड़े कारणों की जरूरत नहीं है। ऐसा ही एक त्यौहार है वैशाखी। यह लोगों को एक-दूसरे से बांधे रखने का पर्व है। जिसे कई धर्म के लोग अपने ही अंदाज में मनाते हैं।

उडि़सा की वैशाखी पोणा संक्राति
उडि़सा समाज वैशाखी को पोणा संक्राति के तौर पर मनाता है। संक्राति पर यहां महिलाएं शिवजी की पूजा कर दही-गुड़ से बनाया गया पोणा अर्पित किया जाता है। मंदिरों में अन्न और वस्त्र दान किये जाते है। भोग के लिए चावल की खीर बनायी जाती है। इसके साथ भोजन में बैंगन, केला, आलू, कद्दू का डालमा बनाया जाता है। यह पर्व ईष्ट से अच्छी बारिश की कामना की प्रार्थना के लिए मनाया जाता है।

बंगाल में शुरू होता है नववर्ष
बंगाल का नया वर्ष वैशाख के दिन से शुरू होता है। इस दिन को शुभो नाँबो बाँरसो के नाम से जाना जाता है। बंगाल में इस दिन से ही फसल की कटाई शुरु होती है। महिलाएं शुभो नाँबो बाँरसो के दिन घर आई नई फसल के धान से पकवान बनाती है।

केरल में नई शुरूआत
दक्षिण भारत में खासतौर पर केरल में इस दिन धान की बुआई का काम शुरु होता है। यहां वैशाखी को मलयाली न्यू ईयर भी माना जाता है। इस दिन घर को खूबसूरती से सजाया जाता है। व्यंजन बनते हैं और मंदिरों में भोग चढ़ाया जाता है।

असम का बिहू
बैसाखी के दिन असम के लोग बिहू पर्व मनाते हैं। यह पर्व नए दिवस और नई उमंग का घोतक है। बिहू पर्व के मौके पर लोक नृत्य के साथ-साथ सार्वजनिक सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

कश्मीर में मनाते हैं नवरेह
शास्त्रों में उल्लेखित सप्त ऋषियों के अनुसार इस दिन नवरेह नाम यानि नववर्ष मनाया जाता है। यह परंपरा कश्मीर में आज भी जीवित है। लोग नववर्ष के तौर पर इस दिन को सेलीब्रेट कर एक-दूसरे को बधाई देते हैं। यह किसी त्यौहार से कम नहीं है।

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